
परिचय
INS Mahe (P80) भारतीय नौसेना का नया युद्धपोत है, जो Mahe क्लास एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) श्रेणी का पहला पोत है। इसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में निर्मित किया गया और 24 नवम्बर 2025 को मुंबई नौसैनिक डॉकयार्ड में कमीशन किया गया।
इस पोत का मुख्य उद्देश्य भारत के तटस्थ क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी गश्त, तटीय रक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा है। INS Mahe श्रेणी में 80% से अधिक भारतीय-निर्मित सामग्री है, जो आत्मनिर्भर भारत के तहत तैयार की गई है।
पुराना INS Mahe (मिनस्वीपर वर्ग)
देश एवं नौसेना: यह पोत भारतीय नौसेना का हिस्सा था।
यह सोवियत संघ (USSR) में कोलपिनो निर्मित Yevgenya-वर्ग के एक इनशोर मिनस्वीपर के रूप में बनाया गया था। इसकी पतवार ग्लास रिइंफोर्स्ड प्लास्टिक की थी।
इसे 16 मई 1983 को नौसेना में कमीशन किया गया और 15 मई 2007 को सेवामुक्त किया गया।
यह तटीय खानों की पहचान एवं निष्क्रिय करने, बंदरगाह रक्षा और तटीय गश्त के लिए प्रयुक्त होता था। पोत में दो 25 मिमी के दोहरे तोप-तुला हथियार थे। इसकी अधिकतम गति लगभग 12 नॉट्स (22 किमी/घंटा) थी और यह 100 टन भार वहन कर सकता था।
पुराने INS माहे ने मलाबार तट के तमाम छोटे बंदरगाहों का दौरा किया और कई नौसैनिक अभ्यासों, खोज एवं बचाव अभियानों तथा गश्ती/एस्कॉर्ट ड्यूटीज़ में भाग लिया। इसका नाम फ्रांसीसी उपनिवेश माही (माहे), कोच्चि के पास स्थित पुल्लयरीनगर (अब पॉन्डिचेरी केंद्रशासित प्रदेश) के अभिलेखीय नाम पर रखा गया था।
नया INS माहे (Mahe-क्लास ASW-SWC)
निर्माण: इसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि में बनाया गया। इसका निर्माण अनुबंध वर्ष 2019 में हुआ था और डीजल–वॉटरजेट प्रणोदन से लैस यह पोत भारतीय आत्मनिर्भरता पहल का प्रतीक है।
नया INS माहे को 23 अक्टूबर 2025 को नौसेना को सुपुर्द किया गया तथा 24 नवम्बर 2025 को मुंबई डॉकयार्ड में कमीशन किया गया है। वर्तमान में यह पश्चिमी नौसैनिक कमान में ‘साइलेंट हंटर’ के पद पर तैनात है (नारा “Silent Hunter” है)।
इस पोत का मुख्य कार्य तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना है। यह उपविमानों के विरुद्ध लड़ाई के साथ-साथ समुद्री मार्गों की निगरानी और तटीय गश्त का काम भी करेगा। Mahe पोत में DRDO द्वारा विकसित अभय सोनार (Hull-Mounted Sonar) सहित गहरे पानी का सोनार सिस्टम, LFVDS आदि लगे हैं, और यह 2 ट्रिपल लाइटवेट टॉरपीडो लॉन्चर, RBU-6000 एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर एवं 30 मिमी की सतह-लक्ष्य तोप सहित विभिन्न आयुधों से लैस है। यह पोत 25 नॉट्स (46 किमी/घंटा) की उच्च गति से तैनात हो सकता है।
कोचीन शिपयार्ड में 30 नवम्बर 2023 को इसका शुभारंभ हुआ था, और हस्तांतरण समारोह के बाद अक्टूबर 2025 में नौसेना को सौंपा गया। 24 नवंबर 2025 को इसका कमीशनिंग समारोह मुंबई में आयोजित किया गया, जिसमें उच्च सैन्य अधिकारी मौजूद थे। इसे लेकर भारतीय नौसेना ने इसे “समुद्र तट पर एक नई क्षमता” बताया है।
तकनीकी विशिष्टताएँ
पुराना INS माहे (मिनस्वीपर):
विस्थापन -100 टन (पूर्ण भार), लंबाई 26 मीटर, अधिकतम गति 12 नॉट्स, रेंज – 300 नॉट्स 10 किमी/घंटा। चालक दल क्षमता 25 (10 अधिकारी सहित) का था। आयुध के रूप में दो 25 मिमी/80 एसएलएल बंदूकें लगी थीं। सोनार द्वारा तटीय खानों का पता लगाने की क्षमता थी।
नया INS माहे (ASW-SWC):
विस्थापन 896–1,100 टन (पूर्ण भार), लंबाई 78 मीटर, बोझाई 11.26 मीटर, ड्राफ्ट 2.7 मीटर। अधिकतम गति 25 नॉट्स (46 किमी/घंटा) है। चालक दल क्षमता 57 (7 अधिकारी + 50 नाविक)। आयुध में 1×30 मिमी गैटलिंग तोप, 2×12.7 मिमी एम2 रिमोट गन, 1×RBU-6000 एंटी-सबमरीन रॉकेट लांचर और 2× ट्रिपल हल्के टॉरपीडो लांचर शामिल हैं। सेंसिंग में डेक-माउंटेड अभय सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार (LFVDS) शामिल हैं।
भारतीय नौसेना ने 24 नवंबर 2025 को तमिलानी की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित INS Mahe को नौसेना में शामिल किया जाएगा। यह Mahe क्लास की पहली Anti-Submarine Warfare (ASW) Shallow Water Craft (SWC) है, जिसे खास तौर पर तटीय और सागर-किनारे के इलाकों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें बेअसर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
INS Mahe सिर्फ एक जहाज नहीं है यह भारत की नौसैनिक क्षमता, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक दृष्टिकोण में एक बड़ा परिवर्तन दर्शाता है।
यह जहाज भारत के पुदुचेरी क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक तटीय शहर माहे के नाम पर रखा गया है।
जहाज के प्रतीक चिन्ह में उरुमी तलवार को दर्शाया गया है, जो केरल की पारंपरिक लड़ाकू कला कलरीपायट्टु में प्रयोग होने वाली एक लचीली तलवार है।
यह चुस्ती, सटीकता और घातक क्षमता का प्रतीक है, जो इस युद्धपोत की भूमिका को बखूबी दर्शाता है।
यह जहाज Det Norske Veritas (DNV) की वर्गीकरण (classification) मानकों के तहत बनाया गया है।
Mahe में 80% से अधिक स्वदेशी (indigenous) कंटेंट है, जो भारत की रक्षा निर्माण क्षमता में एक बड़ा कदम है।
INS Mahe को शैलो (उथले) पानी में ऑपरेशन के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है, जहां बड़े युद्धपोतों की गतिशीलता और गहराई सीमित हो सकती है।
1. आकार और डिमेंसन
- लंबाई: लगभग 78 मीटर।
- बीम (चौड़ाई): लगभग 11.36 मीटर।
- ड्राफ्ट (जलगहराई): लगभग 2.7 मीटर।
- विस्थापन (displacement): लगभग 1,100 टन
2. प्रणोदन प्रणाली
यह जहाज डीज़ल इंजन + वॉटर-जीट (water-jet) प्रणोदन प्रणाली से लैस है।
इस प्रणाली का फायदा यह है कि यह बिना आवाज (acoustic signature) के अधिक चपलता (maneuverability) देती है, खासकर उथले पानी में, जो पनडुब्बी रोधी ऑपरेशनों के लिए महत्वपूर्ण है।
चालक दल की संख्या इस तरह निर्धारित की गई है कि जहाज लंबे गश्त मिशनों को चलाने में सक्षम हो सके, साथ ही आवश्यक झड़पों में प्रतिक्रियाशीलता बनाए रखे।
4. स्टील और संरचनात्मक डिजाइन:
जहाज का हल और संरचना ऐसे डिज़ाइन किए गए हैं कि वे शोर (noise) को कम करें ताकि दुश्मन पनडुब्बियों के पास आते समय उनकी पहचान कर सके।
स्ट्रक्चर में ध्वनिक डंपिंग मटेरियल शामिल है, जिससे जहाज की आवाज़ कम हो और इसे “स्टील्थ” जैसे गुण मिलें।
हीट सिग्नेचर (तापीय संकेत) प्रबंधन की तकनीक भी डिज़ाइन में शामिल हो सकती है, जिससे जहाज को रडार और तापीय डिटेक्शन से छिपाने में मदद मिलती है।
Mahe में एडवांस्ड सोनार सिस्टम लगाये गए हैं। जहाज में आधुनिक संचार प्रणाली और सिस्टम फ्यूजन तकनीक मौजूद होगी जिससे वह अन्य नौसेनाओं (जैसे पैंड-फ्लाईट विमान, हेलीकॉप्टर) के साथ जानकारी साझा कर सके।
Mahe में युद्ध क्षति नियंत्रण प्रणाली (damage control), पावर मैनेजमेंट और बैटल मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं।
6. हथियार एवं युद्ध प्रणाली:
रॉकेट / ASW रॉकेट: Mahe में मल्टी-फंक्शनल एंटी सबमरीन रॉकेट सिस्टम है, जिसका उपयोग पनडुब्बियों को निष्क्रिय करने में किया जाएगा।
टॉरपीडो लॉन्चर्स: इसके पास ट्रिपल हल्के टॉरपीडो लॉन्चर हैं, जो भारत के Advanced Light Weight Torpedo (ALWT) के अनुरूप है।
माइन-लेइंग: Mahe में माइन रेल (mine rails) जैसी व्यवस्था है, जिससे ज़रूरत पड़ने पर एंटी-सबमरीन माइन डिप्लॉय किए जा सकते हैं।
नज़दीकी रक्षा:
30 मिमी की एक नौसैनिक गन लगी है, जो इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम के साथ है।
12.7 मिमी की दो रिमोट-कंट्रोल्ड गन माउंट्स संभवतः बोर्ड पर मौजूद हैं, जो छोटे खतरों (जैसे छोटे बोट, पनडुब्बी-सर्फेसिंग लक्ष्य) के लिए उपयोगी होंगी।
भूमिका और ऑपरेशनल महत्व
INS Mahe का परिचय भारतीय नौसेना के रणनीतिक और सामरिक दृष्टिकोण में कई मायनों में बदलाव का संकेत देता है।
1. तटीय सुरक्षा और Littoral Warfare
Mahe क्लास का उद्देश्य विशेष रूप से तटीय (littoral) क्षेत्रों में ऑपरेशन करना है। ऐसे इलाकों में बड़े और हेवी फ्रिगेट या डिस्ट्रॉयर कठिनाई से काम कर सकते हैं, लेकिन Mahe जैसे छोटे और चपल जहाज आसानी से गश्त कर सकते हैं।
इसके डिज़ाइन के कारण यह shallow water में बेहतर काम कर सकता है और पनडुब्बियों की गहराई और आवाज़ का फायदा उठाकर उन्हें ट्रैक और निष्क्रिय कर सकता है।
2. पुंजी भूमिकाएँ (मिशन):
Mahe कई तरह की भूमिकाएँ निभा सकता है:
पनडुब्बी-विरोधी युद्ध (ASW): इसका प्राथमिक उद्देश्य पानी के नीचे खतरों (जैसे दुश्मन पनडुब्बियाँ) का पता लगाना और निष्क्रिय करना है।
अंडरवाटर सर्विलांस: यह सतह के नीचे की आवाज़, सिग्नेचर और ध्वनि तरंगों का विश्लेषण कर सकता है।
निम्न-तीव्रता समुद्री ऑपरेशन (Low Intensity Maritime Operations, LIMO): ये मिशन गैर-परंपरागत खतरों जैसे समुद्री आतंकवाद, तस्करी, समुद्री जुर्म आदि में मददगार हो सकते हैं।
माइन-लेइंग: ज़रूरत पड़ने पर यह पोर्ट एप्रोचेस या रणनीतिक क्षेत्रों में माइन डालकर एरिया-डिनाइल (क्षेत्र निषेध) कर सकता है।
खोज और रेसक्यू (Search & Rescue): इसके डिज़ाइन में ऐसे ऑपरेशन को सपोर्ट करने की क्षमता है।
3. “Silent Hunter” की भूमिका:
नौसेना सूत्रों ने Mahe को “Silent Hunter” बताया है। इसका मतलब यह है कि यह जहाज चुपचाप और लगातार गश्त कर सकता है, पनडुब्बियों की गतिविधियों का पता लगा सकता है और समय रहते उनके खतरों को neutralize करने में सक्षम है।
यह तटीय आधारों, पोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और समुद्री-संचार मार्गों की सुरक्षा के लिए बेहद अहम होगा, खासकर उन इलाकों में जहां पनडुब्बी खतरों की संभावना अधिक है।
रणनीतिक महत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
INS Mahe की कमीशनिंग सिर्फ एक नए जहाज को बेड़े में जोड़ना मात्र नहीं है इसका व्यापक रणनीतिक महत्व है:
1. आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) की दिशा में बड़ा कदम
Mahe में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है, और कुछ रिपोर्ट में यह आंकड़ा 90% तक बताया गया है।
यह भारत की रक्षा निर्माण (defence manufacturing) क्षमता की परिपक्वता को दर्शाता है। इसे विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम करने के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
Cochin Shipyard का यह प्रोजेक्ट यह दिखाता है कि भारतीय शिपयार्ड आधुनिक, जटिल और तकनीकी रूप से संवेदनशील नौसैनिक जहाज बना सकते हैं।
पनडुब्बी खतरों को नियंत्रित करने की क्षमता में सुधार INS Mahe
आज के समय में कई राष्ट्र अपनी पनडुब्बी क्षमताओं को बढ़ा रहे हैं। ऐसे में तटीय क्षेत्रों में शैलो वाटर (उथले पानी) में पनडुब्बियों की लो यां हाईटेक गतिविधि भी बढ़ सकती है। Mahe जैसे वॉरशिप इस चुनौती का सामना करने में मदद करेंगे।
यह जहाज भारतीय नौसेना को उस क्षेत्र में अधिक सक्रिय और चौकस बनने का अवसर देता है, जहां बड़े जहाजों की पहुंच या प्रतिक्रिया सीमित होती है।
चूंकि Mahe एक छोटे आकार का जहाज है और हाई-मॉबिलिटी डिज़ाइन (वॉटर-जीट आदि) से लैस है, इसे आवश्यकतानुसार तेजी से तैनात किया जा सकता है।
यह तटीय गश्त, त्वरित प्रतिक्रिया मिशन और उच्च खतरे वाले तटीय इलाकों में “फ़र्स्ट रिस्पॉन्डर” की भूमिका निभा सकता है।
माना जा रहा है कि Mahe क्लास के जहाजों में मॉड्यूलर डिज़ाइन हो सकता है, जिससे भविष्य में सेंसर, हथियार और सिस्टम को अपग्रेड करना आसान होगा।
इससे नौसेना अपनी आवश्यकताओं और उभरते समुद्री खतरों के अनुसार जहाज को अनुकूलित कर सकती है।
चुनौतियाँ और सीमाएँ
हालाँकि Mahe में बहुत बड़ी क्षमता है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियाँ और सीमाएं भी हैं:
1. उत्पादन गति और समयरेखा
Mahe क्लास में कुल 8 जहाजों का निर्माण तय है। पर यह निर्भर करेगा कि शिपयार्ड कितना तेजी और सुसंगत रूप से इसका निर्माण कर पाता है।
किसी देरी या औद्योगिक बाधा की स्थिति में नौसेना की इसकी तटीय ASW क्षमता बढ़ाने की योजना प्रभावित हो सकती है।
2. सीमित समुद्री गोदाम और हथियार क्षमता
चूंकि Mahe एक शैलो वाटर क्राफ्ट है, यह बड़े महासागरीय युद्ध संचालन (blue-water operations) में उतनी प्रभावी नहीं हो सकती जितनी कि बड़े फ्रिगेट या डिस्ट्रॉयर।
हथियारों की सीमित क्षमता (जैसे टॉरपीडो, माइन-लेइंग) इसे कुछ जटिल ASW स्थितियों में बाधित कर सकती है, विशेष रूप से जब बड़े पनडुब्बी बेड़े और आधुनिक पनडुब्बियों का सामना करना हो।
3. अंडरवाटर खुफिया और समर्थन संरचना
Mahe की प्रभावशीलता केवल तभी पूरी होगी जब इसे अन्य खुफिया संपत्ति (पैट्रोल एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर, पनडुब्बी डिटेक्शन नेटवर्क) के साथ समन्वय में ऑपरेट किया जाए।
नौसेना को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह जहाज न सिर्फ तटीय गश्त कर सके, बल्कि अन्य संसाधनों के साथ सामूहिक रणनीति में सम्मिलित हो सके।
4. मेन्टेनेंस और लॉन्ग टर्म अपग्रेडिंग
एक नया डिज़ाइन और तकनीक का प्लेटफॉर्म होने के नाते, Mahe को नियमित रखरखाव और ऑबोलिसेंस (पुराने होने की समस्या) का सामना करना पड़ सकता है।
भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि देशी सप्लायर, ऑटोमेशन सिस्टम और मड्यूलर सेंसर के लिए लॉन्ग-टर्म सपोर्ट मौजूद हो।
तुलना और सामरिक दृष्टिकोण
INS Mahe की भूमिका और डिजाइन को अगर अन्य देशों के नौसैनिक प्लेटफार्मों से तुलना की जाए, तो कई बिंदु सामने आते हैं:
बहुत देशों के पास छोटे ASW क्राफ्ट या कोरवेट होते हैं, लेकिन Mahe का उच्च स्वदेशी कंटेंट इसे विशेष बनाता है।
इसके वॉटर-जीट प्रणोदन और सोनार प्रणाली इसे शोर में चुप रहने की बेहतर क्षमता देती है जो मनचाही खुफिया और ASW मिशनों के लिए जरूरी है।
रणनीति के दृष्टिकोण से, Mahe भारत की नौसैनिक doctrine में लिटोरल डोमिनेंस (तटीय प्रभुत्व) की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भविष्य की संभावनाएँ
INS Mahe का कमीशनिंग सिर्फ शुरुआत है आने वाले वर्षों में इसके कई संभावित प्रभाव और उपयोग हो सकते हैं:
1. पूरा Mahe-क्लास बेड़ा बनने पर असर
जैसे-जैसे अन्य सात Mahe-क्लास के जहाज चुने जाएंगे और कमीशन होंगे, भारतीय नौसेना की तटीय ASW शक्ति में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
यह बेड़ा पश्चिमी और पूर्वी तटों दोनों पर तैनात किया जा सकता है, जिससे भारत की समुद्री-रणनीतिक पहुंच और गश्ती क्षमता बढ़ेगी।
2. नई तकनीकी एकीकरण और अपग्रेड
भविष्य में Mahe में नए प्रकार के सोनार, स्व-अद्यतन गाइडेड टॉरपीडो और अन्य आधुनिक युद्ध प्रणालियाँ जोड़ी जा सकती हैं।
मॉड्यूलर डिज़ाइन होने से संभावनाएँ खुली हैं कि भविष्य में पूरी तरह स्वायत्त ऑपरेशन (Unmanned / Autonomous मिशन) की ओर भी बढ़ा जाए।
3. राजनीतिक और सामरिक संदेश
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, Mahe का परिचय यह संदेश देता है कि भारत सिर्फ बड़े युद्धपोत नहीं बना पा रहा है, बल्कि उन्नत, तटीय ASW क्षमताओं वाला बेड़ा बना रहा है।
यह भारत की समुद्री सुरक्षा नीति को मजबूत करता है और यह दिखाता है कि भारत अपनी प्रमुख समुद्री सीमाओं की रक्षा को गंभीरता से ले रहा है।
4. औद्योगिक विकास और रोजगार
इतने स्वदेशी कंटेंट वाले जहाजों का निर्माण भारत में नौसेना-शिपबिल्डिंग उद्योग को बढ़ावा देगा।
इससे नौसेना-उद्योग श्रृंखला (supply chain) में छोटे और मध्यम भारतीय कंपनियों को अवसर मिलेगा — जिससे रोजगार पैदा होंगे और तकनीकी क्षमताएँ विकसित होंगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
INS Mahe एक प्रतीक है यह भारत की आत्मनिर्भरता (Aatmanirbhar Bharat) की लड़ाई में नौसैनिक शक्ति का नया स्तंभ है। तकनीकी रूप से उन्नत, चपल और बहुत ही रणनीतिक रूप से डिज़ाइन किया गया यह युद्धपोत पनडुब्बी रोधी युद्ध, तटीय सुरक्षा और गश्ती ऑपरेशनों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Mahe-क्लास जहाजों की तैनाती से भारतीय नौसेना अपनी रणनीतिक चौकसी (vigilance) को बढ़ा सकती है, खुफिया और ASW क्षमताओं को मजबूत कर सकती है, और समुद्र पर अपने नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बना सकती है। इसके अलावा, यह शिपबिल्डिंग उद्योग और देश के रक्षा उत्पादन ढांचे को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगा।
मुकाबले की दृष्टि से देखें तो Mahe एक छोटा लेकिन ताकतवर कदम है और जैसे-जैसे इसके अन्य साथियों का निर्माण पूरा होगा, यह कदम एक बड़ी लहर में बदल सकता है, जो भारत की नौसैनिक शक्ति और सामरिक पहुंच को और सुदृढ़ करेगा।
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